बहरे कई प्रकार के



बहरे      कई   प्रकार   के,    भांत -     भांत   के लाभ |
जब तक काम पड़े  नहीं, तब तक लाभ ही लाभ ||
तब तक लाभ ही लाभ ,  चिल्ला कर वक्ता  कहे |
मन मन हँसता जाय , वक्ता का  पसीना बहे ||
कह 'वाणी' कविराज , पोस्ट   मेन  एमो लाया |
सुनी  एक आवाज ,तीन मंजिल  कूद आया ||

1 टिप्पणी:

  1. कुंडली तो चोखी कही भाया।
    बहरो दिमाग को घणो तेज होया करे।
    ओ ध्यान राखण री बात हे।

    राम-राम

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